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प्रभु चैन की बजा दो बंसी रे


प्रभु चैन की बजा दो बंसी रे 

कहीं वैर ना रहे नफरत ना रहे
चारों ओर को शांति शांति रे 
कहीं वैर ना रहे नफरत ना रहे...
एकता के जग में गीत सजे
मिलवर्तन का संगीत सजे
हो मधुर-मधुर हर वाणी रे
कहीं वैर ना रहे नफरत ना रहे....
लगे हर नर-नारायण जैसा 
कर दे तू कुछ जादू ऐसा
देवों की लगे जग नगरी रे
कहीं वैर ना रहे नफरत ना रहे..
करुणा का मन में दीप जले 
हृदय में प्रेम ही प्रेम पले 
निकले ना प्रेम की अर्थी रे
कहीं बैर ना रहे नफरत ना रहे...
प्रभु सारे जगत से पाप मिटे 
हर पीड़ा हर संताप मिटे
सुख पाए बिलखती धरती रे
कहीं वैर ना रहे नफरत ना रहे...

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